हिमालय का वर्णन:-
हिमालय संस्कृत के 'हिम' तथा 'आलय' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका शब्दार्थ 'बर्फ़ का घर' होता है। हिमालय भारत की धरोहर है। हिमालय पर्वत की एक चोटी का नाम 'बन्दरपुच्छ' है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले में स्थित है। इसकी ऊँचाई 20,731 फुट है। इसे सुमेरु भी कहते हैं। हिमालय एक पूरी पर्वत शृंखला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत को अलग करता है। यह भारतवर्ष का सबसे ऊँचा पर्वत है, जो उत्तर में देश की लगभग 2500 किलोमीटर लंबी सीमा बनाता है और देश को उत्तर एशिया से पृथक करता है। कश्मीर से लेकर असम तक इसका विस्तार है।
भौगोलिक तथ्य
हिमालय पर्वतमाला की गणना वैज्ञानिक विश्व की नवीन पर्वत मालाओं से करते हैं। इसका निर्माण सागर तल के उठने से आज से पाँच-छह करोड़ वर्ष पहले हुआ था। हिमालय को अपनी पूरी ऊँचाई प्राप्त करने में 60 से 70 लाख वर्ष लगे। यह अपनी ऊँची चोटियों के लिये प्रसिद्ध है। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय की है। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में कई हिमालय की चोटियाँ हैं। अन्य पर्वतों की अपेक्षा यह काफ़ी नया है। हिमालय से सम्बद्ध पहली पर्वत शृंखला पीर पंजाल पर्वतश्रेणी है। हिमालय के एक भाग का नाम 'कलिंद' है। यहीं से यमुना निकलती है। इसी से यमुना का नाम 'कलिंदजा' और 'कालिंदी' भी है। दोनों का मतलब 'कलिंद की बेटी' होता है। यह जगह बहुत सुन्दर है, पर यहाँ पहुँचना बहुत कठिन है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिंम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रता पूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी पर्वत 20,731 फीट ऊँचाई से प्रकट होती है। हिमालय पर्वतश्रेणी के अतिरिक्त अनाई शिखर भारत की सबसे ऊँची चोटी है।
पौराणिक संदर्भ
पौराणिक वर्णनों में हिमालय का उल्लेख 'हिमवान' नाम से मिलता है। वास्तव में वैदिक काल से ही हिमवान भारतीय संस्कृति का प्रेरणा स्रोत रहा है। ऋग्वेद में 'हिमवान' शब्द का बहुबचन में (हिमवन्तः) प्रयोग किया गया है, जिससे हिमालय की बृहत पर्वत श्रंखला का बोध होता है। हिमालय के मजबूत शिखर का भी ऋग्वेद में उल्लेख है।[1]
हिमालय संस्कृत के 'हिम' तथा 'आलय' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका शब्दार्थ 'बर्फ़ का घर' होता है। हिमालय भारत की धरोहर है। हिमालय पर्वत की एक चोटी का नाम 'बन्दरपुच्छ' है। यह चोटी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल ज़िले में स्थित है। इसकी ऊँचाई 20,731 फुट है। इसे सुमेरु भी कहते हैं। हिमालय एक पूरी पर्वत शृंखला है, जो भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत को अलग करता है। यह भारतवर्ष का सबसे ऊँचा पर्वत है, जो उत्तर में देश की लगभग 2500 किलोमीटर लंबी सीमा बनाता है और देश को उत्तर एशिया से पृथक करता है। कश्मीर से लेकर असम तक इसका विस्तार है।
भौगोलिक तथ्य
हिमालय पर्वतमाला की गणना वैज्ञानिक विश्व की नवीन पर्वत मालाओं से करते हैं। इसका निर्माण सागर तल के उठने से आज से पाँच-छह करोड़ वर्ष पहले हुआ था। हिमालय को अपनी पूरी ऊँचाई प्राप्त करने में 60 से 70 लाख वर्ष लगे। यह अपनी ऊँची चोटियों के लिये प्रसिद्ध है। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय की है। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में कई हिमालय की चोटियाँ हैं। अन्य पर्वतों की अपेक्षा यह काफ़ी नया है। हिमालय से सम्बद्ध पहली पर्वत शृंखला पीर पंजाल पर्वतश्रेणी है। हिमालय के एक भाग का नाम 'कलिंद' है। यहीं से यमुना निकलती है। इसी से यमुना का नाम 'कलिंदजा' और 'कालिंदी' भी है। दोनों का मतलब 'कलिंद की बेटी' होता है। यह जगह बहुत सुन्दर है, पर यहाँ पहुँचना बहुत कठिन है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिंम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रता पूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी पर्वत 20,731 फीट ऊँचाई से प्रकट होती है। हिमालय पर्वतश्रेणी के अतिरिक्त अनाई शिखर भारत की सबसे ऊँची चोटी है।
पौराणिक संदर्भ
पौराणिक वर्णनों में हिमालय का उल्लेख 'हिमवान' नाम से मिलता है। वास्तव में वैदिक काल से ही हिमवान भारतीय संस्कृति का प्रेरणा स्रोत रहा है। ऋग्वेद में 'हिमवान' शब्द का बहुबचन में (हिमवन्तः) प्रयोग किया गया है, जिससे हिमालय की बृहत पर्वत श्रंखला का बोध होता है। हिमालय के मजबूत शिखर का भी ऋग्वेद में उल्लेख है।[1]
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